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हरिद्वार के कनखल में स्थित जगतगुरु आश्रम में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा का त्यौहार 🚩🙏🚩

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महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग 3000 ई. पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन व्यास जी ने शिष्यों एवं मुनियों को सर्वप्रथम श्री भागवतपुराण का ज्ञान दिया था।
गुरु पूजन अर्थात देव पूजन। गुरु का जीवन ध्येयमूर्ति ही नहीं अपितु ध्येय का साकार स्वरूप होता है। मानव जीवन में ध्येय आते ही संयम आता है, संयम से शक्ति संग्रहीत हो जाती है और उसी शक्ति से मानव ध्येय के समीप जाता है और आखिर उसका साक्षात्कार करता है।
इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। साधारण भाषा में कहें, तो गुरु वह हैं जो ज्ञान की गंगा बहाते हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन प्रातःकाल स्नान पूजा आदि नित्यकर्मों को करके उत्तम और शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
हर वर्ष की भांति इस बार भी कनखल स्थित जगतगुरु आश्रम में शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम के सानिध्य मे गुरू पूर्णिमा का पर्व मनाया गया।
शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज जी ने परम पूज्य सम्राट ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज जी के समाधि स्थल पर पूजा अर्चना किया।
और उसके बाद गुरू पूर्णिमा पर्व के शुभ अवसर पर स्वामी राजराजेश्वर महाराज जी की पूजा अर्चना उनके अन्य शहरों से आए हुए भक्तो ने शुरु किया जिस पूजा में हरिद्वार के विधायक मदन कोशिश जी (विधायक), और गुरू जी के शिष्य अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर एवं दक्षिण काली पीठाधीश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी जी भी गुरू जी की पूजा अर्चना करके उनका शुभ आशीर्वाद प्राप्त किया। तथा गुरु पूजा में जगतगुरु कमेटी के महामंत्री रविंद्र सिंह भदौरिया जी , और उपाध्यक्ष जगदीश गुप्ता जी, कोषाधक्ष्य नारायन शास्त्री जी , और अन्य संत और अन्य शहरों से आए हुये भक्तगण मौजूद रहे।